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बुधवार, 25 अगस्त 2010

इंकलाब का गीत / गोरख पाण्डेय

हमारी ख्वाहिशों का नाम इन्क़लाब है,

हमारी ख्वाहिशों का सर्वनाम इन्क़लाब है,

हमारी कोशिशों का एक नाम इन्क़लाब है,

हमारा आज एकमात्र काम इन्क़लाब है,

ख़तम हो लूट किस तरह जवाब इन्क़लाब है,

ख़तम हो किस तरह सितम जवाब इन्कलाब है,

हमारे हर सवाल का जवाब इन्क़लाब है,

सभी पुरानी ताकतों का नाश इन्क़लाब है,

सभी विनाशकारियों का नाश इन्क़लाब है,

हरेक नवीन सृष्टि का विकास इन्क़लाब है,

विनाश इन्क़लाब है विकास इन्क़लाब है,

सुनो कि हम दबे हुओं की आह इन्कलाब है,

खुलो कि मुक्ति की खुली निगाह इन्क़लाब है,

उठो कि हम गिरे हुओं की राह इन्क़लाब है,

चलो बढ़े चलो युग प्रवाह इन्क़लाब है ।

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