नागार्जुन की राजनीति विषयक कविताओं का मूल्यांकन महेंद्र सिंह मीना
नागार्जुन जनकवि हैं पर उनकी कविता खोखले नारों सा बर्ताव नहीं करती ,वह संवेदना और मर्म की कविता है| राजनीति नागार्जुन को खास आकर्षित करती है | तात्कालिक राजनितिक घटनाओं पर लिखी उनकी कविताओं में असाधारण सरलता है, साथ ही तीखा व्यंग भी |मुक्तिबोध की तरह उनहोंने समूची राजनितिक व्यवस्था को पद्व्द्द नहीं किया है बल्कि घटनाओं, व्यक्तियों आदि के चलते निम्नवर्गीय मानसिकता में उठने वाली अनुभूतियों को स्वर दिया है| 'आओ रानी हम धोएँगे पालकी'या 'आए दिन वहार के' या 'इन्दूजी इन्दूजी क्या हो गया आपको'आदि कविताओं में राजनीति की तात्कालिकता पर व्यंग ही नहीं है, बल्कि राजनीति का स्थायी चेहरा भी है|
नागार्जुन एक प्रतिवद्ध कवि हैं | उनकी प्रतिवद्धता कोई संकुचित नहीं है, वह मानवीय कल्याण के विराट सपने से जुड़ी हुई है | उनकी प्रतिवद्यता जीवन ,जीवन के संघर्ष ,और जीवन के सौन्दर्य के प्रति है |कहना न कि यह जीवन समाज के मेहनतकश लोगों का जीवन है | नागार्जुन अपने समय की सारी समस्याओं से टकराते हैं वे समस्याएं चाहे राजनितिक हों,आर्थिक हो, या सामाजिक,एक युग की धड़कन उनके साहित्य में है|