प्रेमचंद की दलित विषयक कहानियाँ और हमारा समय _ महेंद्र सिंह मीना
प्रेमचंद की दलित कहानियों का मूल्यांकन दो तरह से किया जा
सकता है ,पहला आधार यह है की प्रेमचंद की दलित विषयक और उनसे मिलती जुलती कहानियों को केन्द्र में रखकर आज के दलित आन्दोलन का मूल्यांकन किया जाए | दूसरा आधार यह बचता है कि आज के दलित आन्दोलन को केन्द्र में रखकर प्रेमचंद की कहानियों का मूल्यांकन किया जाए |आज के दलित लेखकों का मानना है कि दलित कहानियों में केवल उन्हीं कहानियों को रखा जा सकता है जिनमे दलित समस्या को उजागर किया गया हो ,उसके लिए आर्थिक समस्या के उजागर होने के साथ-साथ सामाजिक समस्या का उल्लेख होना जरूरी है क्योकिं आर्थिक समस्या तो सवर्णों में भी हो सकती है |इसके साथ ही इस प्रश्न में यह भी देखना होगा कि प्रेमचंद के पात्रों एवं उस समाज में आज कितना परिवर्तन हुआ है और आज के दौर में प्रेमचंद कि दलित कहानियाँ कहाँ ठहरती है?.....................|
सोमवार, 13 अक्टूबर 2008
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